ओबीसी को जनगणना में शामिल कराने ओबीसी महासभा ने दिया ज्ञापन।

 


 ग्वालियर ।ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एड धर्मेंद्र सिंह कुशवाह 9827323595 ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया  कि ग्वालियर स्थित फूलबाग चौराहे पर ओबीसी महासभा ग्वालियर इकाई द्वारा प्रदर्शन कर संभागीय आयुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री मंत्री के नाम ज्ञापन दिया गयाविदित हों कि केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक 10 बर्ष में होने वाली जनगणना में ओबीसी संगठनों की लम्बे समय से जातिगत जनगणना कराये जाने किं मांग को हर बार के तरह इस बार भी अनदेखी कर पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय किया जा रहा हैजबकि जनगणना 2011 में सामाजिक संगठनों के आग्रह के बाद तात्कालीन संप्रग सरकार ने जाति -आधारित जनगणना करने के लिए सहमति व्यक्त की थी, लेकिन इसे सोशल आर्थिक सर्वेक्षण के नाम पर विलोपित कर दिया गयापूर्व में केंद्रीय मंत्री द्वारा अगस्त 2018 में मीडिया को बयान दिया गया कि "वर्तमान मापदंडों में ओबीसी श्रेणी शामिल नहीं है ओबीसी वर्ग के लिए समय आने पर डेटा एकत्र करने की परिकल्पना की जाएगी"
लेकिन सरकार द्वारा तैयार वर्तमान जनगणना प्रश्नावली फार्म में ओबीसी की जातिगत जनगणना हेतु इस बार भी कोई कॉलम नही दिया गया जो कि सम्पूर्ण ओबीसी समाज के साथ एक बार पुनः सुनियोजित अन्याय है।पिछली बार ओबीसी वर्ग की जाति आधारित जनगणना 89 साल पहले 1931 में ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित की गई थी। उसके बाद से देश में अभी तक कोई ओबीसी वर्ग का डेटा उपलब्ध नहीं है।वर्तमान सरकार की मंशा पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है कि अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) से संबंधित को तो जनगणना के  28 मानकों में शामिल किया गया। लेकिन इसके वर्तमान स्वरूप में ओबीसी वर्ग के लिए कोई उप-श्रेणी को शामिल नहीं किया है। जो कि संविधान ओर उसकी धारा 340 के खिलाफ है।विविधता के साथ एक लोकतांत्रिक देश में हैं लोकतंत्र में हर नीति बहुमत के आधार पर काम करती है। लोकतंत्र की सफलता के लिए विभिन्न समुदायों,वर्ग की संख्या गणना ओर उसका रिकॉर्ड होना चाहिए ताकि संख्या के आधार पर न्याय दिया जा सके जिस कारण ही हमारे देश के वर्तमान ओबीसी वर्ग की जातियों के साथ असंतुलन और अन्याय हो रहा है।
यदि सरकार द्वारा 2021 में ओबीसीवर्गकीसामाजिक-आर्थिक-जातिगत जनगणना कराई जाती है तो देश के ओबीसी समाज की जातिगत समुदाय की सही संख्या ज्ञात होगी जिससे उनको लोकतांत्रिक सुविधाएं दी जा सकती हैं।जो कि ओबीसी वर्ग के सामाजिक,आर्थिक,शैक्षणिक और राजनीतिक विकास की योजना बनाने और उनके प्रतिनिधित्व के उचित क्रियान्वयन के लिए मददगार साबित होगी साथ ही जाति/वर्ण को शिक्षण संस्थानों, नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में प्रवेश में अपना न्यायोचित हिस्सा प्राप्त करने में मदद मिलेगी जो कि देश के समग्र विकास में अहम योगदान निभायेगा ।जनगणना 2021 के प्रश्नावली फार्म में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कॉलम को जोड़ते हुए ओबीसी की जाति-आधारित गणना के लिए शामिल कर अंतिम रूप दे 
यदि इस बार भी जनगणना फॉर्म में ओबीसी जातिगत जनगणना को शामिल नहीं किये जाने की स्थिति में ओबीसी समाज सड़को पर निकलकर आंदोलन करने पर मजबूर होगा जिसकी सरकारे जिम्मेदार होगी  प्रदर्शन ज्ञापन में मुख्यरुप से ओबीसी महासभा संस्थापक ओबीसी विजय कुमार, मंशाराम कुशवाह, दीपेंद्र यादव,सौरभ कुशवाह, अमन श्रीवास, जीतू लोधी,पिंकी कुशवाह,डॉ गोपाल रजक मुख्य रूप से उपस्थित हुए।



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