राम ज्ञान हैं तो सीता भक्ति कानाम- श्रीमती कृष्णा देवी
 श्रीमती कृष्णा देवी जी

डबरा।समाज को जगाने का काम तो वृद्ध लोग ही करते हैं और वहीं यह काम तो युवा तभी कर सकते हैं जब उनको इन वृद्धों का साथ मिल जाए। अगर आज के युवा इनसे सबक ले लें तो समाज क्या सम्पूर्ण राष्ट्र की दिशा और दशा बदलने में देर नहीं लगेगी। उक्त उद्गार मानस कोकला श्रीमती कृष्णा देवी ने आज लोहगढ़ की पहाड़ियां पर चल रहे श्री रामचरित मानस सम्मेलन के समापन दिवस के अवसर पर धर्म की गंगा बहाते हुए कहे।उन्होंने आगे कहा परमात्मा के बल का बखान तो वे ही आदमी कर सकते हैं जो अपने बल का बखान करते हैं। और जो खुद के बल में भूले रहते हैं उनका परमात्मा के बल पर से विश्वास उठता चला जाता है और अंतिम समय में जब आदमी परमात्मा को भजना है तब तक वह अपने जीवन में बहुत कुछ खो चुका होता है। 
राम ज्ञान हैं तो सीता भक्ति का नाम है। जब ज्ञान में भक्ति का संपुट लग जाए तब आदमी के अंदर अभिमान होने वाला नहीं है। भगवान को पाने के लिए भजन किया जाता है और जब भगवान के दर्शन हो जावे तब भी भजन नहीं छोड़ना चाहिए।
  अयोध्या धाम से पधारे *श्री रामेश्वर दास जी रामायणी* ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा
*कोई काम से जुड़ा तो कोई दुकान से जुड़ा।*
*सच्चा भक्त तो वह है जो भगवान से जुड़ा।।*
परमात्मा ने हमको कितना कीमती शरीर दिया है हम उसके प्रति धन्यवाद ज्ञापित नहीं करते जबकि बीमार होने डाक्टर को मुंह मांगा पैसा देने के बाद आदर के साथ हम उसके चरणों में नतमस्तक हो जातें हैं। इस पृथ्वी पर आकर भगवान को भूल जाना सबसे बड़ा पाप है, इससे बचने के लिए हमें चौबीस घंटों में कम से कम एक घंटा भगवान स्मरण को परिवार सहित जरूर निकालना चाहिए। जीवन का साथी सिर्फ राम नाम है,सारी साधनाएं फैल हो सकती हैं मगर राम नाम नहीं। उसकी याद हरपल बनी रहे जीवन तभी सार्थक है।
 मानस कोकला *श्रीमती अखलेश्वरी देवी* ने अपने प्रवचनों के माध्यम से कहा पुत्र वही होता है जो अपने पितरों को नरक से निकाल कर स्वर्ग में पहुंचाने का काम करे अगर इस पृथ्वी पर कोई पुत्र गलत काम करता है तो उनके पितरों को कष्ट झेलने पड़ते हैं।
श्री राकेश रामायणी ग्वालियर* ने सार की बात बताते हुए कहा कि जिनके सुमिरन मात्र से जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल जावे उस प्यारे राम नाम को नहीं भूलना चाहिए।धर्म सभा में श्री रामजी रामायणी,मंच संचालक श्री देवेन्द्र दुवे डबरा के साथ धूमेश्वर धाम के संत श्री अनुरुद्ध वन महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहा लोहगढ़ पहाड़ियां पर चल रहे श्री रामचरित मानस प्रवचनों से अब इस क्षेत्र में और ज्यादा परिवर्तन होना चाहिए, हर घर में श्री रामचरित मानस का पाठ हो लोग यहां से यह संकल्प लेकर जाए तब ही ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों की  सफलता होगी।आयोजनकर्ताओं को बधाई देते हुए ऐसे धार्मिक कार्यक्रम सदैव होते रहने की अपील भी की है।  पूर्व मंत्री श्रीमती इमरती देवी सुमन ने भी आर्थिक सहयोग देकर प्रवचनों का लाभ लिया।इस अवसर पर मंच संचालक श्री दयाराम पटवारी, डॉ देवाराम गुर्जर, सरपंच हरीसिंह गुर्जर, रामवरण सिंह गुर्जर,भगवत शरण, ओपी सेन बरोठा, डॉ हाकिम सिंह,राममोहन,एडवोकेट नरेंद्र सिंह गुर्जर सहित हजारों की संख्या में लोहगढ़ वासी उपस्थित रहे। जिन्होंने समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।
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