फर्जी मीडियाकर्मी व एक पत्रकार पर चार चार चैनल की आईडी मिडिया जगत में यह रूकना चाहिए सभी जिला कलेक्टर ,एसडीएम पुलिस करें कार्यवाही---- शरदजोशी
फर्जी मीडियाकर्मी व एक पत्रकार पर चार चार चैनल की आईडी मिडिया जगत में यह रूकना चाहिए सभी जिला कलेक्टर ,एसडीएम पुलिस करें कार्यवाही---- शरदजोशी                 
 रतलाम/भोपाल/ डबरा/सागर ।श्रमजीवी पत्रकार संघ मध्य प्रदेश के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष व मध्य प्रदेश शासन द्वारा अधिमान्य वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी जी ने कहा प्रदेश के जिला इकाई, तहसील संभाग में श्रमजीवी पत्रकार संघ बहुत तेज गति से पत्रकारो व संपादको के हित में काम कर रहा है लेकिन उसे रोकने के लिए    प्रदेश में मिलते जुलते नाम से कई पत्रकार संगठनों का पंजीकरण कर दिया गया है।कुछ पत्रकार संगठन एसे भी  है जिनकी यदि जांच कि जाय तो फर्जीवाड़ा व्यापक पैमाने पर पाया जा सकता है।जिनका न कभी आडिट होता है और न ही सदस्यता की छानबीन, वे अपने कार्यक्रमों में अधिकारियों ,नेताओं को बुलाकर प्रभाव बनाते हैं ,आश्चर्य है यह लोग  वास्तविकता का पता लगाएं बिना कार्यक्रम में चले भी जाते है। कई ,शहरों साथ साथ ग्वालियर ,पिछोर,टीकमगढ़,जबलपुर,डबरा, भोपाल,रीवा,दतिया,भितरवारसागर,शिवपुरी,अशोकनगर,मुरैना में जो कई यूट्यूब चैनल के भी पत्रकार बनकर शहर में स्वच्छ छवि वाले पत्रकारों की विजिट लगा रहे हैं छविया खराब कर रहे कुछ तो सोशल मीडिया के नाम से पत्रकार बनकर शहरों में घुम रहे और अधिकारियों के मुंह लगे रहते हैं और आगे पीछे देखते हैं जिससे आमजनता देखती है तो अधिकारीयो बीच आमजनो की दलाली करते हैं ऐसे पत्रकार तहसील कार्यालय देखे गए हैं। इनके पास किसी भी संस्था के आई कार्ड भी नहीं हैं और नाही व पत्रकार हैं सिर्फ बड़ी संस्थाओं में नौकरी करते हैं और अपने आप को पत्रकार कह कर शासन प्रशासन से गुमराह करते नजर आते हैं ऐसे लोगों पर प्रशासन शक्ति लाएं और एक संस्था में काम करने पर पत्रकार एक नहीं हजारों संस्थाओं की आईडी रखकर तहसील क्षेत्र में काम करते नजर आ रहे हैं इन पर भी अंकुश लगाया जावे और सक्षम अधिकारी इनकी आई कार्ड पी आर ओ लेटर थाना प्रभारी चेक करें। इतना ही नही जिनका असल में पत्रकारिता से कोई नाता नही है वे भी पत्रकार संगठनों के पदाधिकारी बने हुए है। संस्था पंजीकरण करने वाली संस्था की भी जांच होना चाहिए कि उसके अधिकारियों ने बिना पड़ताल के पंजीयन केसे कर दिये, साथ ही मिलते जुलते नाम से भी संगठनों  का पंजीयन केसे कर दिया। अनेक संस्थाओं द्बारा भ्रमित कर भयादोहन करने का धंधा बना लिया है।इसी प्रकार कई समाचारपत्र अस्तित्व में नही है और नही शासन के निर्देश के अनुरूप प्रकाशित हो रहे है फिर  भी यदाकदा  बिना नियम के अखबार छापे जा रहे है।संबंधित विभाग भी भयभीत रहकर इनके विरुद्ध कार्यवाही नही करता, वह यह भी नही देखता कि कोन सा अखबार नियमानुसार निकलता भी है कि नही ।केवल शासन की सूची में जुड़ने के लिए त्योहारी रुप में निकलने वाले इन अखबारों पर सरकार की निगाह जरूरी है।मीडिया में चल रहे इस फर्जीवाड़े का शुध्दि करण  पारदर्शिता जरूरी है।  इस बात की जांच भी जरूरी है कि कतिपय पत्रकार संगठन अधिमान्य शब्द का उल्लेख सदस्यता कार्ड में कर पत्रकारों में भ्रम पैदा करते है जबकि अधिमान्यता शासन के नियमों के तहत होती हैं इसके कार्ड भी जनसंपर्क विभाग जारी करता है। एसे सदस्यता कार्ड जहा भी प्रकाश में आए जिला दण्डाधिकारी को जप्त करवाना चाहिए ताकि अधिमान्य शब्द का दुरूपयोग को रोका जा सके।एसे संगठनों पर कार्यवाही भी होना चाहिए तभी असल और मेहनतकश मीडिया और पत्रकारों के अच्छे दिन आएंगे।
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