राम को मनुष्य मानने वालो को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं --स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती जी (रामगोपाल जोशी डबरा की कलम द्वारा)
ग्वालियर। (रामगोपाल जोशी की कलम से) पं सूर्य कंत शर्मा के रामबाग कालोनी निवास पर गत दिवस आयोजित प्रेस वार्ता में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी  ने कहा भारत में निर्मित वातावरण अभूतपूर्व है अत्यात प्राचीन सनातनी धार्मिक क्षेत्र मैं जो मिलावट की जा रही है यह अत्यंत चिंताजनक है ढाई हजार वर्ष प्राचीन परंपरागत गुरुपीठो में से आचार्य होने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य है कि हम आप के माध्यम से बात रखें ।
श्रीराम जन्मभूमि के लिए हमने सक्रिय प्रथम 1983मे चित्रकूट में रेली आयोजित की विभिन्न सम्प्रदायों के  समस्त हिन्दूओं के धर्माचायो के संग्रह कर रामजन्म भूमि के लिए पुनरुद्धार समिति का रजिस्ट्रेशन कराया। विभिन्न पक्षकारों मध्य  दशरथ कौशल्या रथ यात्रा के माध्यम से समस्त देश की लाखों जनता का हस्ताक्षर रूपी जनादेश अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि हिंदुओं की ही है प्राप्त किया इसके लिए हमने मुसलमानों को भी राजी किया 80 के दशक में मुनि सुनील कुमार से दूरभाष मैं बात होने पर उन्होंने हमें दिल्ली बुलाया जिसमें राम जन्मभूमि के लिए विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच सहमति की बात होनी थी हमने कहा मुसलमान बात नहीं मानते तो उन्होंने कहा आप सप्रमाण अपना पक्ष रखें तो मुसलमान बात मानेंगे तब हमने अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि का दर्शन कर विक्रमादित्य द्वारा निर्मित मंदिर के चौदह कसौटी के कमरे के चित्र वहां विद्यमान मंगलकलश  एवं हनुमान जी के चित्र लिए इसके बाद सुशील कुमार के निवास अहिंसा भंवन  दिल्ली जिसमें हिंदू मुस्लिम समझोता के उद्देश्य से एक सभा आयोजित की उसमें विभिन्न मुस्लिम समुदाय के साथ विश्वहिंदू परिषद के पदाधिकारी एवं हम उपस्थित थे उस सौंदर्य पूर्ण सभा में हमने मुसलमान जनप्रतिनिधियों से कहा हम सभी धर्मों का आदर करते हैं इसमें इस्लाम भी एक है क्या आपके धर्म के अनुसार जहां पहले से ही हिंदू मंदिर हो वहां मस्जिद बन सकती है तब मुसलमान जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हमारे धर्म के प्रतिकूल है तब हमने उन्हें मंदिर के साथ दिखाने अयोध्या आने को कहा सब सहमत हो गए तभी आचार्य धर्मेंद्र एवं गुमन माल लौड़ा यह कहते हुए खड़े हो गए कि राम जन्मभूमि में मुसलमान नहीं जा सकते शंकराचार्य हिंदुओं के प्रतिनिधि नहीं हैं। तब हमें विश्व हिंदू परिषद की मानसिकता का पता चला कि किस तरह संघ और विश्व हिंदू परिषद भाजपा के लिए मुसलमान और हिंदुओं को विभाजन कर राम जन्मभूमि को सत्ता प्राप्ति का साधन बना रहे हैं इसकी पुनरावृति पुनः तब भी देखने को मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने एक मध्यस्थता कमेटी गठन कर कोर्ट के बाहर सहमति की बात करने कही थी हमारी संस्था राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर सेस्वामीअविमुक्तेश्वरानंद ने राम जन्मभूमि हिंदुओं को दी जाए इस पर मुसलमान पछकारों को राजी कर लिया था किंतु यह भी षडयंत्र कर उसे खारिज कराया गया जिसकी कल्पना थी आज वही परिदृश्य उपस्थित हैं जवकि अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि में मंदिर निर्माण ट्रस्ट में केवल भाजपा,संघ व विश्व हिंदू परिषद के ही लोग सम्मिलित हैं राम मंदिर की जगह भाजपा का मुख्यालय बनाया जा रहा है इसके लिए पूरे देश से चंदा लिया जा रहा है जो न्याय लोगों तथाकथित मंदिर के लिए मोटी रकम दे रहे हैं उनको शासन से उपकृत कराया जा रहा है धर्मनिरपेक्षता संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं क्या यह मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र के अनुरूप हो रहा है हमारी संस्था श्रीरामजन्मभूमि पुनरुद्वार समिति ने कोर्ट में सिद्ध किया था कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि है जिसे हमारे शास्त्र भी प्रमाणित करते हैं अयोध्या में ऐडवार्ड के द्वारा लगाए गए हम में बतलाते हैं कि यह श्री राम जन्मभूमि है हमने हंसबकल की पुस्तक केस की जिसमें राम जन्मभूमि का प्राचीन नक्शा तथा राम जन्मभूमि की लोकेशन बतलाता है आईने अकबरी बाबरनामा जैसी पुस्तकों से यह प्रमाणित किया जाता है कि अयोध्या में बाबरी कभी आया ही बाबर कभी आया ही नहीं था वहां स्थित शिलालेख कूट चित्र हैं ऐसी स्थिति में कोर्ट द्वारा यह कहा जाना की मंदिर उस स्थान पर बनाया जाएगा जहां मस्जिद थी तथ्य के विपरीत है पूर्व में सरसंघचालक मोहन भागवत से जब राममंदिर के संबंध में पूछताछ की तो बताया मंदिर का नहीं राम एक महापुरुष हैं उनकी जन्मभूमि में  हमें उनका एक स्मारक बनाना है तो यह मंदिर न्याय है या स्मारक न्यास है हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से रामलला जीते हैं रामलला ब्रह्मा के सगुण साकार अवतार हैं जिनका का कागभुशुण्डि और भगवान शिव ध्यान करते हैं जिसका शयन जागरण भोग इत्यादि उपचारों से मंदिर में भूमि मंदिर में पूजन किया जाता है भारत में ऐसे मंदिर भी हैं जहां आरती करने पर विग्रह में जलबिंदु का दर्शन होता है किंतु स्मारक बना कर तो उनको जडता की श्रेणी में डाल दिया जाता है क्या रामलला नेताओं के स्टेच्यू के समान मात्र पत्थर हैं जैसे कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय रामलला के पक्ष में हैं तो बालक महापुरुष नहीं हो सकता वह तो अवतारी ही हो सकते हैं जिनका मंदिर तो वही बनेगा जो उन्हें भगवान मानता हो अयोध्या के वैष्णव साधु संत घर द्वार छोड़कर भगवान राम के भजन करने अयोध्या में बैठे हैं किसी महापुरुष का नहीं रामलला हमें हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा देकर जो पार्टी सत्तारूढ़ हुई वही अब मंदिर का दूसरा ही रूप दिखा रही है जैसे मछली पकड़ने वाले बंसी में मांस का टुकड़ा लगाकर मछली पकड़ते हैं इसी तरह मंदिर का नाम लेकर वैभव विष्णु और सनातन धर्म यों को प्रभावित कर सकता प्राप्त की है गई है आदि शंकराचार्य जी ने भक्तों को परास्त कर वैदिक धर्म की स्थापना की थी धर्म रक्षा के लिए भारत की चार दिशाओं में 4 धर्म पीठ स्थापित किए उत्तर में ज्योतिष्पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी पूर्व में पूरी और पश्चिम में शारदा पीठ द्वारका अयोध्या का क्षेत्र ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य की धार्मिक सीमा में आता है ट्रस्ट निर्माता स्वयं पता कर ले वर्तमान में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य कौन है सरकारी कर्मचारी जो ट्रस्टी बनाए गए हैं वह धर्मनिरपेक्षता सरकार के प्रति हैं वे धार्मिक कार्यों के लिए वैध नहीं है हिंदू शब्द का परिभाषा आर एस एस  के अनुरूप जो भारत में जन्मा हो वह हिंदू है विश्व हिंदू परिषद के अनुसार जो मुस्लिम विरोधी है वह हिंदू है और संवैधानिक जैन सिख बौद्ध को भी हिंदू मानता है तो वहां बनाने वाले हिंदू राम मंदिर का क्या स्वरूप होगा यह स्पष्ट होना चाहिए भारत के माथे में गौ हत्या का कलंक लगा है और विश्व का सर्वाधिक गोमांस निर्यात कर देश भारत बना हुआ है स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर गायों को घरों से उत्पादित कर जहां रखा जा रहा है वहां भूखे प्यासे दम तोड़ रही हैं गाय मनुष्य का भारतीय संस्कृति की पहचान है इसे भी नष्ट किया जा रहा है गोचर भूमि  भयंकर अतिक्रमण की चपेट में है जिसे पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है सरकारी जमीन पर अतिक्रमण तो हटाए भी जा रहे हैं किंतु गोचर भूमि की चिंता सरकार को नहीं है सरकार अभी सरकार सभी कुछ बेचने पर आमादा है सरकार मुंह में राम बगल में छुरी की चरित्र करते हुए जय श्री राम कहकर सत्ता हासिल कर रही है छुरी से गौ हत्या कर विदेशों में धन हासिल कर रही है सरकार शराब नीति में आज कन्याओं के से बलात्कार के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं जन आंदोलन के बाद कड़े कानून जरूर बने किंतु इसमें अपराध नहीं रुक रहे अपन तू अब साक्ष्य से बेचने के लिए अबोध कन्याओं की हत्या कर दी जा रही है हमने प्रारंभ से ही कहा धर्म शिक्षा से अपराध बोध की भावना जगाई जा सकती है स्कूलों कॉलेजों में स्वतंत्रता पूर्व भगवान राम का चित्र लगाया जाता है वहां अब हटा दिया गया है सरकार राम मंदिर बनाने में तो उत्सुक है परंतु स्कूल कॉलेज स्कूल कॉलेज में धार्मिक शिक्षा देने जैसे धर्मनिरपेक्षता संविधान यादी याद आने लगता है भगवान राम के मर्यादा मर्यादित चरित्र की शिक्षा से ही समाज का सुधारा जा सकता है अस्पताल अगर खुल जाते हैं तो उससे भी मनुष्य को बहुत कुछ राहत मिलेगी जिससे जो बीमारियां देश के अंदर व्याप्त हैं उसे बचा जा सके अगर बच्चों को भगवान राम के बारे में बताया ही नहीं जाएगा तो आने वाले 30 सालों में राम मंदिर का क्या औचित्य रह जाएगा सरकार की यही दुर्गति नीति वर्तमान और भविष्य के लिए बहुत घातक है।
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