डबरा/बिलौआ। प्रधानमंत्री आवास योजना में 7 पटवारी एवं तीन कर्मचारी दोषी अब देखना है क्या दोषियों को ईओडब्ल्यू जांच करेगा इन दोषियों की चल अचल संपत्ति की ।
हरीओम चोरासिया संवाददाता 
 डबरा।बिलौआ नगर परिषद द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कच्चे मकानों की सर्वे की जाकर 1037 हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु  प्रति हितग्राही ढाई लाख रुपए का अनुदान उपलब्ध कराया गया आवास योजना के तहत   कुछ आवास हितग्राहियों को राशि उपलब्ध कराई गई जो प्रधानमंत्री आवास योजना गाइडलाइन से बाहर है को राशि दी गई है यदि शासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया गया होता तो इसमें से कई हितग्राही योजना से बाहर हो गए होते और शासन का लाखों रुपए का राजस्व उन हितग्राहियों को मिलता जो आज भी आवास से वंचित है नगर परिषद में आवास योजना में हुई अनियमितता पर रवि कांत चौरसिया ने माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर में याचिका दायर की उच्च न्यायालय द्वारा संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्यप्रदेश भोपाल को आदेशित किया गया कि नगर परिषद बिलौआ मे हुई अनियमितता की जांच कर प्रतिवेदन माननीय न्यायालय में प्रस्तुत करें जिस पर से संचालनालय नगरीय प्रशासन भोपाल को निर्देशित कर जांच हेतु कमेटी गठित करने व तत्य उजागर करने निर्देशित किया गया  जिस पर से तीन अधिकारियों की कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास ग्वालियर संभाग  एवं संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास ग्वालियर चंबल संभाग और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व डबरा की टीम गठित की गई जिन्होंने जांच उपरांत पाया की आवास  सर्वे में कर्मचारियों  द्वारा काफी अनियमितताएं की गई हैं जिससे शासन को काफी राजस्व हानि हुई है जिसमें जांच दल द्वारा  तत्कालीन 10 कर्मचारियों को दोषी पाया जिसमें पटवारी बृजेश अगरिया पटवारी  बिलोबा ,मुकेश सिकवार पटवारी बिलौआ, अमित रहेजा पटवारी ग्राम लदॆरा, प्रशांत माहोर पटवारी ग्राम मकोड़ा  घनश्याम भदोरिया पटवारी ग्राम जंगीपुर ,रणवीर राजपूत पटवारी ग्राम जोरासी, रवि भदोरिया पटवारी ग्राम गढी  और तीन कर्मचारी नगरीय निकाय से  है जिसमें अशोक कुमार करोसिया आर एस आई सेवा निवृत्त ,बनवारी लाल जाटव भ्रत्य और महेश यादव संविदा कर्मी को दोषी पाते हुए इनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु  सक्षम अधिकारी को निर्देशित किया गया है याचिकाकर्ता ने बताया कि आवास योजना में शासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का ना ही सर्वे टीम द्वारा  ना ही जांच दल द्वारा आवास योजना गाइडलाइन की अनदेखी की गई है अगर जांच सही तरीके से की जाती तो उसमें अनियमितता उजागर हो सकती है।
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