छत्तीसगढ़।कांग्रेस शासन में सरपंच एवं ग्रामीणों की दबंगई के चलते एक मजदूर का मकान तोड़ा पूरा घर हुआ बेघर प्रशासन अधिकारी मौन। योगेन्द्र उके
 *भाजपा नेता पदाधिकारी विधायक भी देख रहे हैं मजदूर के बेघर होने का मजा*
जिला।बालोद तहसील डौडी के ग्राम सूरडोगर मे मानव समाज को शर्मसार करने वाली घटना जिसमें ग्राम के प्रमुख सरपंच एवं दबंगई ग्रामीणों के चलते लाठी डंडे एवं लात घुसे से मार-मार कर एक परिवार को उनके ही घर से बेघर कर दिया गया और पुरा घर को तोड़ दिया
जहां पर पीड़ित व्यक्ति गणेश राम बघेल उम्र- 40 के साथ साथ उनके परिवार में उनकी पत्नी रुखमणी -38 एवं तीन बच्चों के साथ उनका पूरा परिवार 2005  से उस गांव में रह रहे है एवं रोजी मजदूरी का कार्य कर अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे थे जहां पर 30 जनवरी22 को सरपंच कोमेस कोर्राम( कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष डौंडी ), ग्राम के उपसरपंच एवं समस्त पंच गण के साथ साथ ग्रामवासी लाठी-डंडों के साथ गणेश राम के घर पहुंच गए ,उनके और उनके पूरे परिवार वालों को घसीट कर घर के बाहर खींच कर निकाला और उनके उपर लात घुसे और लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट कर जातिगत गाली गलौज  करने लगे और कहने लगे तुम मोची लोग इस गांव को छोड़कर चले जाओ इस गांव में तुम लोगों के लिए कोई भी जगह नहीं है और तुम्हें इस गांव में रहने नहीं देंगे, पूरे गांव वाले को एक साथ हमला करते हुए देख आपना जान बचा कर पूरा परिवार डर कर भागने लगा और पुलिस थाने पहुंचकर इस मामले की संपूर्ण जानकारी दिया गणेश बघेल ने बनाया बताया कि मैं और मेरा पूरा परिवार कई सालों से इस गांव में रहते हैं
और किसी को कोई परेशानी भी नहीं थी मैं कई बार गांव के पंचायत में जमीन देने के लिए एवं आवास के लिए आवेदन दे चुका था लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी मुझे ना ही जमीन मिला ना ही आवास को कोई सुविधा और मेरे पास रहने के लिए कोई उचित जगह भी नहीं था मेरे नाम से मेरा राशन कार्ड ,आधार कार्ड ,मतदाता कार्ड, बिजली बिल बना है आर्थिक तंगी की वजह से पिछले कई सालों से मैं आवास हिन था इस वजह से मैंने गांव से लगभग 1 किलोमीटर दूर श्मशान घाट के पास  दो कमरों का  झुग्गी झोपड़ी बना कर था जिससे कभी किसी को कोई परेशानी नहीं था उस जगह पर मैं लगभग  पिछले 9 सालों से रह रहा हूँ और अपना गुजर-बसर कर रहा हूँ लेकिन यह बात गांव के सरपंच कोमेस कोर्राम ( कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष डौंडी) को रास नहीं आया।और एक दिन अचानक ग्राम के सरपंच ने गांव वालों को भड़का कर इसे इस गांव में नहीं रहने देना है केह कर सभी एक साथ मिलाकर आ गए और पीड़ित परिवार के घर को तोड़ने लगे।सरपंच एवं गांव वालों ने तोड़ दिया गरीब का आशियाना ग्राम के सरपंच उपसरपंच एवं पंचगण और  गांव वालों ने एक साथ मिलकर गांव के बाहर रह रहे उस पीड़ित व्यक्ति के पूरे घर को तोड़ दिया गया और घर में रखे सभी सामानों को घर के बाहर निकाल कर आग के हवाले कर दिया गया जिसमें बच्चों के पढ़ने के कॉपी पुस्तक और घर के सदस्यों के पूरे  कपड़े को भी जला दिया गया और घर में रखे खाने पिने के समान और अन्य सभी
सामानों को बाहर निकाल कर फेंक दिया गया

पीड़ित परिवार वालों के साथ किया भारी मारपीट
गांव के सरपंच के साथ साथ ग्राम वासियों ने एक साथ मिलकर 
लाठी-डंडे लेकर आए और पीड़ित परिवार को घसीट घसीट कर और उसी लाठी-डंडों से उनके साथ भारी मारपीट करने लगे

अपने आशियाने को डहता देख गांव वालों को रोकने का किया प्रयास
गांव वाले पीड़ित परिवार के घर को तोड़ने लगे तभी अपने आशियाना को ढहता देख 
गांव वालों को रोकने का भारी प्रयास किया और हाथ जोड़कर उनसे मिन्नतें करने लगा कि मेरे घर को मत तोड़ो 
पर सरपंच के द्वारा भड़का कर लाए हुए लोग महिला एवं बच्चों को भी नहीं छोड़ा और लात घुसे के साथ उनसे भी मारपीट करने लगे

पति को मार खाता देख बचाने आए पत्नी और बच्चे
भीड़ के द्वारा अपने पति को मार खाता देख पत्नी डर कर अपने बच्चे के साथ अपने पति को बचाने आई लेकिन 
गुस्से में बौखलाई भीड़ पत्नी एवं बच्चों को भी नहीं छोड़ा और लाठी-डंडों से उन पर भी वार कर दिया  और पूरे परिवार वालों को बडी ही बेरहमी से पीटा गया
अगर वह परिवार अपना जान बचाकर नहीं भागता तो गुस्साए में भीड़ पता नहीं उनके साथ क्या करती पीड़ित परिवार के लोगों ने बताया कि हम अभी बहुत डर के साए में जी रहे हैं हमें मानसिक रूप 
से भी प्रताड़ित किया जा रहा है

घर से बेघर हो गया हंसता खेलता परिवार
सरपंच और गांव वालों की इस दबंगई के वजह से एक हंसता खेलता परिवार पूरी तरह से तबाह हो चुका है और अपने ही घर से बेघर हो चुके हैं   पाई पाई का मोहताज हो गए हैं यहां तक कि खाने पीने को कुछ भी नहीं है घर के बच्चों ने बताया कि पहनने तक के कपड़े भी अब हमारे पास नहीं है और खाना भी खा रहे हैं  तो सागौन पेड़ के पत्तों में रखकर खाना खा रहे हैं 
इतना अत्याचार एक परिवार पर
कोई कैसे कर सकता है यह कहां का न्याय है यह सोचने वाली बात है कि इतना निर्दयी कोई इंसान कैसे हो सकता है पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि सरपंच के द्वारा हमें बार-बार यह धमकी दिया जाता था कि तेरा और तुम्हारे पूरे परिवार वालों का राशन कार्ड ,जॉब कार्ड से नाम कटवा दूंगा और तेरे बच्चों को स्कूल से निकलवा दूंगा कह कर जान से मारने की धमकी भी देता था

*बीच जंगल में श्मशान घाट में पेड़ के नीचे सोने को मजबूर परिवार।*
गांव के बाहर 1 किलोमीटर दूर एक जंगल में श्मशान घाट के पास पेड़ के नीचे अब वह पूरा परिवार अपने टूटे मकान के पास खुले आसमान में सोने को मजबूर हैं जहां पर इतनी ठंड में उनके पास पहनने को कपड़े नहीं और ओडने बीछाने को चादर तक नहीं है उनके पास खाना बनाने तक के बर्तन भी नहीं है क्योंकि उन बर्तनों को भी पूरी तरीके से तोड़ दिया गया है यहां तक कि जिस गैस पर खाना बनाया जाता था उस गैस को भी पूरी तरीके से तोड़ दिया गया है तीन ईट को रखकर चूल्हा बनाकर वह अपना भोजन पका रहे हैं।
किसी का घर तोड़ने कौन दिया अधिकार
किसी भी व्यक्ति को किसी का घर तोड़ने का और उनके साथ मारपीट करने का कोई अधिकार नहीं है चाहे वह किसी भी पद पर बैठा बडा अधिकारी , नेता या एक गाँव का सरपंच क्यों ना हो ।कोई भी व्यक्ति किसी पर भी अपनी मनमानी नहीं चला सकता।बच्चों ने पिता से कहा नहीं जाएंगे स्कूल पापा इस मामले में सबसे दुखद घटना यह रही कि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को भी इस घटना का अब मानसिक रूप से प्रताड़ना को  झेलना पड़ रहा है क्योंकि बच्चों ने अपने पिता को बताया की 
स्कूल में दूसरे बच्चे अब हम लोग के ऊपर हंसते हैं कि तुम लोगों के पास रहने को घर नहीं खाने को खाना नहीं मांग मांग कर खा रहे हो मांग मांग के कपड़े पहन रहे हो यह बात को बोलकर सब हमारे ऊपर हंसते हैं इस वजह से अब हम स्कूल नहीं जाएंगे पापा ऐसा मुझे मेरे बच्चे बोलते हैं

बार-बार नोटिस देने के बाद भी नहीं किया खाली जगह
ग्राम के सरपंच कोमेश कोर्राम ने बताया कि गणेश बघेल को 
तहसील और पंचायत से बार-बार जगह खाली कराने का आदेश दिया जा रहा था लेकिन वह उस जगह को खाली करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था इस वजह से ग्रामीणों ने एक साथ बैठक किया 
और गांव वालों एवं पंचायत के द्वारा उसके घर को तोड़ दिया गया 
जिसमें वह  हमारे साथ गाली गलौज और मारपीट भी करना शुरू कर दिया
और हमने कोई गलत कार्य नहीं किया है 

अपराधीयों के खिलाफ करेंगे पूरी कार्यवाही 
डौंडी थाना प्रभारी अनिल ठाकुर ने कहा कि जो इस मामले में आरोपी हैं उनके खिलाफ पूरी कार्रवाई की जाएगी  जांच कर रहे है बेशक पीड़ित परिवार के साथ  गलत हुआ है  जो इसमें अपराधी है उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेंगे।

घटना के बाद चोरी हुआ घर से नगद पैसे व जेवर।

इस घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति अपने छोटे-मोटे कामों से कमाए हुए पैसों को घर में जमा करके रखता था जिसमें लगभग ₹30000 नगद और उनकी पत्नी के पायल मंगलसूत्र जैसे कई कीमती सामान भी घर से चोरी 
कर लिया गया है

*30 जनवरी का मामला लेकिन अभी तक नहीं हुई कोई ठोस कार्यवाही।*
30 जनवरी को पूरे भारत में महात्मा गांधी का पुण्यतिथि मनाया जाता है महात्मा गांधी ने सबको सत्य और अहिंसा पर चलने को सिखाया है लेकिन डौंडी ब्लाक के ग्राम सुरडोंगर में घटि यह घटना कुछ अलग ही बात बयां कर रही है इस घटना को इतने दिन होने के बाद भी अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्यवाही नहीं कीया गया है।
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