संविधान नही बदलने देंगे। क्रांति की मशाल बुझाने नहीं देंगे।
 संविधान बदलने नहीं देंगे *
क्रान्ति की मशाल बुझने नहीं देंगे,
मजलूमों का हक़ छीनने नहीं देंगे,
मरना गँवारा है वतन के लिए,
तिरंगे को कभी झुकने नहीं देंगे।
जातपांत की सियासत करने नहीं देंगे
कौम को आपस में बांटने नहीं देंगे,
लाख कोशिश कर लो तुम नादानों,
मनु का विधान चलने नहीं देंगे।
तहज़ीब के बंधन टूटने नहीं देंगे,
प्रजातंत्र की नींव हिलने नहीं देंगे,
राह में कितने भी बवंडर आएँ,
खुद का स्वाभिमान बिकने नहीं देंगे।
विचारों की सरिता सूखने नहीं देंगे,
मुल्क़ को नफ़रत में जलने नहीं देंगे,
कितनी भी ताक़त लगालो कांटे उगाने वालों,
ज़ालिमों की दहशतगर्दी चलने नहीं देंगे।
भीमजी का कारवां रुकने नहीं देंगे,
बुध्द की धरती को छलने नहीं देंगे,
लगानी पड़े चाहे जान की बाज़ी,
भारत का संविधान बदलने नहीं देंगे।
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कवि- एस. आर. शेंडे, सौंसर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश, पिन-480106, व्हाट्सएप-8103681228
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