छिंदवाड़ा /सौसर-डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता के प्रतीक -शेंडे
 संविधान की बदौलत भारत आज प्रगति के शिखर पर ।

सौंसर। संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में उत्साह के साथ मनाई जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 14 अप्रैल 2022 डॉ. अम्बेडकर जयंती को " विश्व शिक्षा दिवस" घोषित किया है। कनाडा सरकार ने भी बाबासाहाब के जन्मदिन को " समानता दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप से सम्मानित साहित्यकार एस. आर. शेंडे ने बताया कि," डॉ. बाबासाहाब अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता के प्रतीक है।" बाबासाहाब का कहना था कि हम प्रथम भारतीय है और अंत में भी भारतीय है । भारतीय समाज व्यवस्था को पाखंड,भेदभाव से मुक्ति दिलाकर सभी वर्गों को समानता के अवसर दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। बाबासाहाब ने संविधान की प्रस्तावना में ही सभी नागरिकों के लिए समता स्वतंत्रता बन्धुता व न्याय को समाहित कर  राष्ट्रीय एकता प्रस्थापित करने का प्रण लिया है। संविधान के अनुच्छेद 25 के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को स्वेच्छा से किसी भी धर्म की उपासना,प्रचार प्रसार करने की स्वतंत्रता देकर भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने का दर्जा दिया है।  डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं विश्व के श्रेष्ठ विद्वान, प्रखर वक्ता, लेखक, शिक्षाविद, दार्शनिक एवं उत्तम अर्थशास्त्री थे।उनके द्वारा निर्मित बहुजन हिताय बहुजन सुखाय संविधान की बदौलत भारत आज प्रगति के शिखर पर है। श्री शेंडे ने संपन्न, बुद्धिजीवी, समर्थ  वर्ग से अपील की कि, वें शोषितों पीडितों की खुशहाली के लिए अपना योगदान दे।  समाज में भाईचारा स्थापित करें । वर्तमान स्थिति में संविधान की हिफाजत करने एवं संकीर्ण विचारधारा से लड़ने की आवश्यकता है।  उन्होंने सभी लोगों से  14 अप्रैल 2022  अम्बेडकर जयंती हर्षोल्लास से मनाने का अनुरोध किया।साथ ही इसी अप्रैल माह में विभिन्न धर्मों के मनाएँ जाने वाले त्योहारों व धर्मालंबियों  को हार्दिक शुभकामनाएं दी है ।

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